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मध्यस्थ दर्शन – संक्षिप्त परिचय

प्रस्तुत कार्य योजना का स्रोत “मध्यस्थ दर्शन" (सह-अस्तित्ववाद) है, जो सार्वभौम मानवीय संविधान, शिक्षा व स्वराज्य व्यवस्था को प्रतिपादित करता है।

"मध्यस्थ दर्शन" रहस्य से मुक्त है। यह मनुष्य के सम्पूर्ण आयामों की यथार्थता, वास्तविकता और सत्यता को अध्ययन गम्य और बोध गम्य कराता है। "मध्यस्थ दर्शन" अनुभव बल की अभिव्यक्ति, सर्वतोमुखी समाधान की संप्रेषणा, न्याय पूर्ण व्यवहार, नियम पूर्ण व्यवसाय व आचरण पूर्ण पद्धति से जीने की कला को करतलगत कराता है। साथ ही साधार उपायों द्वारा योजनाबद्ध पद्धति से मनुष्य की परस्परता में, भौतिक समृद्धि, बौद्धिक समाधान, अभयता (मानव में निहित समस्त भयों से मुक्ति) व सह-अस्तित्व को सहज सुलभ कराता है।

"मध्यस्थ दर्शन" के अनुसार अस्तित्व में प्रत्येक इकाई समग्रता के साथ भागीदारी का निर्वाह करते हुए अग्रिम विकास के सूत्र से सूत्रित है। इस तथ्य को जानने-मानने, पहिचानने एवं निर्वाह करने के क्रम में "मानव स्वयं में एक व्यवस्था है व समग्र व्यवस्था के साथ भागीदार है।"

अस्तित्व में मानव सभी भावों का दृष्टा है। सभी भावों की समझ ही जीवन जागृति है, जो अनुभव में प्रमाणिकता व विचार में समाधान है। सम्पूर्ण समाधान में मानव तथा नैसर्गिक (मनुष्येतर प्रकृत्ति - जीवावस्था, प्राणावस्था, पदार्थावस्था) सम्बन्धों की पहचान व उनमें निहित मूल्यों को निर्वाह, सहज रूप में होना है।

"मध्यस्थ दर्शन" निम्न ४ भागों में है:

  • मानव व्यवहार दर्शन
  • मानव कर्म दर्शन
  • मानव अभ्यास दर्शन
  • मानव अनुभव दर्शन

जिसमें समग्र अस्तित्व अर्थात अस्तित्व ही "सह-अस्तित्व", अस्तित्व में विकास, विकास क्रम में जीवन, व जीवन-जागृति तथा अस्तित्व में भौतिक-रासायनिक रचना व विरचना का निर्गम अध्ययन समाविष्ट है।

"मध्यस्थ दर्शन" पर आधारित सह-अस्तित्ववादी दृष्टिकोण के आधार पर मानव किस प्रकार मनुष्येतर प्रकृति के साथ, मानव, मानव के साथ, व मानव समग्र अस्तित्व के साथ, सह-अस्तित्व को अनुभव कर सकता है यह निम्न विचारधाराओं में अध्ययन कराया गया है :-

  • समाधानात्मक भौतिकवाद
  • व्यवहारात्मक जनवाद
  • अनुभवात्मक आध्यात्मवाद

सह-अस्तित्ववादी दर्शन के आधार पर ही स्वराज्य (न्याय सुलभता, विनिमय-सुलभता, उत्पादन-सुलभता) व स्वतंत्रता (स्वानुशासन) मानव को "जीने की कला" के रूप में उपलब्ध हो

जाए, इसलिए इसे निम्न शास्त्रों में अध्ययन सुलभ कराया गया है:

  • आवर्तनशील अर्थ चिंतन
  • व्यवहारवादी जन चेतना (मानवीय संविधान व आचार संहिता)
  • मानव संचेतनावादी मनोविज्ञान

इसके साथ ही निम्न योजनाएँ उपलब्ध है जिसका वर्णन (इस योजना प्रारूप में) अन्यत्र किया गया है :-

  • जीवन - विद्या कार्यक्रम
  • उत्पादन - व्यवस्था
  • मानवीय शिक्षा - योजना
  • संविधान - योजना
  • राज्य - व्यवस्था - योजना (अखंड समाज)
  • आवर्तनशील अर्थ व्यवस्था योजना
  • पर्यावरण सुरक्षा योजना
  • मानवीय न्याय व्यवस्था योजना
  • मानवीय स्वास्थ्य संयम योजना